मौका-ए-वारदात पर छानबीन, परिवार और भाई से पूछताछ की; एक घंटे तक पुलिसवालों से भी सवाल किया

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सीबीआई की टीम मंगलवार सुबह हाथरस पहुंच गई। टीम सीधे बुलगढ़ी गांव में मौका-ए-वारदात पर पहुंची। क्राइम सीन की जांच के लिए विक्टिम के भाई को भी वहां ले जाया गया। सीबीआई की टीम ने पीड़िता के भाई, अन्य परिजन से सवाल पूछे। करीब एक घंटे तक टीम ने चंदपा थाने के पुलिसवालों से भी पूछताछ की।

इसके बाद टीम पीड़ित के भाई को कैंप ऑफिस गई। भाई के हाथ में एक थैला था और टीम के साथ में फॉरेंसिक एक्सपर्ट भी थे। बता दें कि पीड़ित परिवार सोमवार रात ही लखनऊ से हाथरस लौटा है।

परिजनों ने कहा- हाईकोर्ट में सब इंग्लिश में बात कर रहे थे, समझ नहीं आया

घर पहुंचते ही मीडियाकर्मियों ने परिवार को घेर लिया। पीड़ित के पिता ने बातचीत में बताया कि ‘‘हाईकोर्ट में सब इंग्लिश में बात कर रये थे। कछु ज्यादा समझ नहीं आओ के का हो रओ है, लेकिन इतनाे जरूर समझ में आओ के डीएम साहब खों डांट पड़ी है।’’ परिवार ने एक बार फिर साफ तौर पर कहा कि जब तक हमें न्याय नहीं मिलेगा, बिटिया की अस्थियां विसर्जित नहीं की जाएंगी।

हाथरस में घटनास्थल पर CBI टीम।

एक घंटे तक हाईकोर्ट में सुनवाई हुई
पीड़ित के पिता के मुताबिक, ‘‘हमाई अपनी जो समस्या हती, जितनी पूरी भई, बोई बताई न्यायालय में। हमें अपनी बेटी कौ शव नहीं देखने दओ। डीएम साब बोल रहे थे कि मंजूरी कर लई ती इन लोगन से बातचीत करके। सुबह शव जलाने पर प्रशासन को दंगा होने की आशंका थी? इस पर पिता कहते हैं कि हां, ऐसा भी बोल रये ते साहब कोर्ट में।”

कोर्ट ने क्या कहा? इस पर बोले कि वो इंग्लिश में बात कर रहे थे… हमाये कछु समझ में ना आई। सुनवाई करीब… आध घंटा-पौन घंटा चलत रई। हम सब लोगन ने कोर्ट में बोला। सारी चीजें बताईं। क्या कोर्ट ने हाथरस केस में प्रशासन की गलती को माना? इस पर पिता कहते हैं कि हां, मानो तो हतो। डीएम को फटकार पर कहा कि हां, लगाई ती। इंग्लिश में बात कर रये थे। सीबीआई जांच पर भरोसे के सवाल पर कहा कि हमने तो जे चीज नहीं बोली कोर्ट में… हमें न्याय मिले तो सीबीआई पे भरोसो है। अस्थियों के विसर्जन पर कहा कि देखो अभी नहीं करेंगे, जब तक न्याय नहीं मिल जात, तब तक नहीं करेंगे। हमाई वकील (सीमा कुशवाहा) से भी ज्यादा बात नहीं हो पाई।’’

जब तक इंसाफ नहीं मिलेगा, अस्थियां विसर्जित नहीं करूंगा
पीड़ित के भाई ने भी कोर्ट रूम की बातें बताईं। सीबीआई जांच को लेकर भाई ने कहा- कुछ भी हो, लेकिन इंसाफ मिले। जब तक इंसाफ नहीं मिलेगा तब तक बहन की अस्थियां विसर्जित नहीं करूंगा।

परिवार के हर सदस्य के साथ था एक सिपाही
एसडीएम अंजली गंगवार ने बताया कि हमने गाड़ियों में सुबह बिस्किट, चिप्स और पानी पर्याप्त मात्रा में रख लिए थे, जिसकी वजह से हमें रास्ते में रुकने की जरूरत नहीं पड़ी। जब हम लखनऊ पहुंचे तो उत्तराखंड भवन में परिवार को लंच भी कराया। इसके बाद हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी होने के बाद हम हाथरस के लिए निकले। हमने परिवार की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हर सदस्य के साथ एक सिपाही लगाया था। एस्कॉर्ट और इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी भी शामिल थे।

क्या है पूरा मामला?
हाथरस में 14 सितंबर को 4 लोगों ने कथित रूप से 19 साल की लड़की के साथ गैंगरेप किया था। यह भी आरोप है कि उसकी रीढ़ की हड्डी तोड़ दी और जीभ भी काट दी थी। दिल्ली में इलाज के दौरान 29 सितंबर को पीड़िता की मौत हो गई। चारों आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए हैं। हालांकि, पुलिस का दावा है कि दुष्कर्म नहीं हुआ था।

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सोमवार को हाईकोर्ट में सुनवाई के बाद देर रात पीड़ित परिवार हाथरस पहुंचा। इस दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।

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